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अध्याय 18 · 78 श्लोक

मोक्षसंन्यासयोग

Mokṣa Sannyāsa Yoga

मोक्ष संन्यास योग

सबसे बड़ा यह अध्याय समस्त गीता का सार है: संन्यास और त्याग का भेद, गुणों के अनुसार कर्म, स्वभावज कर्तव्य, और परम उपदेश — सब कुछ भगवान के शरण हो जाओ, वे समस्त पापों से मुक्त कर देंगे।

विषय: उपसंहार: शरणागति ही मोक्ष का मार्ग

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