अध्याय 18 · श्लोक 22— मोक्ष संन्यास योग
Read this verse in English →यत्तु कृत्स्नवदेकस्मिन्कार्ये सक्तमहैतुकम्।अतत्त्वार्थवदल्पं च तत्तामसमुदाहृतम्॥
लिप्यंतरण
yat tu kṛitsna-vad ekasmin kārye saktam ahaitukam atattvārtha-vad alpaṁ cha tat tāmasam udāhṛitam
शब्दार्थ (अन्वय)
- yat
- — which
- tu
- — but
- kṛitsna-vat
- — as if it encompasses the whole
- ekasmin
- — in single
- kārye
- — action
- saktam
- — engrossed
- ahaitukam
- — without a reason
- atattva-artha-vat
- — not based on truth
- alpam
- — fragmental
- cha
- — and
- tat
- — that
- tāmasam
- — in the mode of ignorance
- udāhṛitam
- — is said to be
भावार्थ
किंतु जो (ज्ञान) एक कार्यरूप शरीरमें ही सम्पूर्णके तरह आसक्त है तथा जो युक्तिरहित, वास्तविक ज्ञानसे रहित और तुच्छ है, वह तामस कहा गया है।
व्याख्या
श्रीकृष्ण तामसिक ज्ञान का वर्णन करते हैं: 'पर वह ज्ञान जो एक ही प्रभाव को संपूर्ण मानकर चिपकता है, बिना कारण के, सत्य में आधार के बिना, और तुच्छ — वह तामसिक घोषित किया जाता है।' श्रीकृष्ण जानने का सबसे निम्न रूप देते हैं। शंकराचार्य तामसिक जानने के चिह्न समझाते हैं: (1) एक चीज़ पर स्थिरता मानो वह संपूर्ण हो (एक हिस्से को संपूर्णता के साथ भ्रमित करना), (2) तर्कसंगत आधार के बिना, (3) चीज़ों की वास्तविक प्रकृति को न समझते, और (4) क्षेत्र में तुच्छ। यह वह देखना है जो एक संकीर्ण टुकड़े को पकड़ता है और इसे सब कुछ मानता है। निकालने योग्य अंतर्दृष्टि तामसिक देखने का सटीक निदान है 'एक हिस्से को संपूर्ण मानना और बिना कारण के उस पर स्थिर होना।' यह असहज रूप से सामान्य है। मन एक विवरण, एक अनुभव, एक संकीर्ण कहानी पकड़ता है, और इसे पूरी तस्वीर मानता है। उदाहरण: 'मैं इस एक चीज़ में विफल रहा, तो मैं पूरी तरह विफल हूँ।' 'उन्होंने यह एक चीज़ गलत की, तो वे बुरे व्यक्ति हैं।' हर एक छोटे हिस्से को पकड़ता है और इसे संपूर्ण में फुलाता है। सबक: अपने में तामसिक चाल नोटिस करो — एक छोटे हिस्से पर स्थिर होना और इसे पूरा सत्य मानना। यह कई क्षेत्रों में होता है: आत्म-निर्णय में, दूसरों को आँकने में, जानकारी अवशोषित करने में। उपाय है फ्रेम चौड़ा करना, तर्क बहाल करना। जब भी तुम निश्चित हो कि कुछ संकीर्ण सब कुछ है, तामसिक देखने पर संदेह करो।
भगवद्गीता 18.22 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?
निकालने योग्य अंतर्दृष्टि तामसिक देखने का सच में उपयोगी निदान है 'एक हिस्से को संपूर्ण मानना और बिना कारण के उस पर स्थिर होना।' यह रोज़मर्रा की संज्ञान में असहज रूप से सामान्य है। मन एक छोटा विवरण, एक बुरा अनुभव, एक संकीर्ण कहानी पकड़ता है, और इसे पूरी तस्वीर मानता है — चुपचाप बाकी सब अनदेखा करते, अक्सर बिना किसी ठोस तर्कसंगत आधार के। उदाहरण हर जगह हैं: 'मैं इस एक चीज़ में विफल रहा, तो मैं एक व्यक्ति के रूप में पूरी तरह विफल हूँ।' 'उन्होंने यह एक चीज़ गलत की, तो वे मूल रूप से बुरे व्यक्ति हैं।' हर एक छोटे हिस्से को पकड़ता है और इसे संपूर्ण में फुलाता है। यह ठीक तामसिक जानना है। सबक: अपने में यह तामसिक चाल नोटिस करो। उपाय सिद्धांत में सरल है पर अभ्यास की माँग करता है: फ्रेम चौड़ा करो, तर्क बहाल करो, हिस्से को संपूर्ण के विरुद्ध जाँचो। जब भी तुम निश्चित हो कि कुछ संकीर्ण सब कुछ है, तामसिक देखने पर संदेह करो।
भगवद्गीता 18.22 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?
निकालने योग्य इनसाइट तामसिक सीइंग का यूज़फुल डायग्नोसिस है 'एक पार्ट को होल मिस्टेक करना और बिना रीज़न के उस पर फिक्सेट करना।' यह एवरीडे थिंकिंग में अनकम्फर्टेबली कॉमन है। माइंड एक स्मॉल डिटेल पकड़ता है और इसे कम्प्लीट पिक्चर के रूप में ट्रीट करता है। एग्ज़ांपल्स एवरीव्हेयर हैं: 'मैं इस वन थिंग में फेल हुआ, तो मैं टोटल फेल्योर हूँ।' 'दिस वायरल स्टोरी रियलिटी है।' हर एक स्मॉल पार्ट पकड़ता है और इसे होल में इन्फ्लेट करता है। सबक: इस तामसिक मूव को अपने में नोटिस करो। रेमेडी: फ्रेम वाइडन करो, रीज़न रिस्टोर करो। जब भी तुम सर्टेन हो कि कुछ नैरो IS एवरीथिंग, तामसिक सीइंग को सस्पेक्ट करो।
भगवद्गीता 18.22 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?
श्रीकृष्ण जानने का सबसे निम्न प्रकार वर्णन करते हैं — तामसिक! यह तब है जब तुम एक छोटी चीज़ पकड़ते हो और इसे पूरा सत्य मानते हो — बिना स्पष्ट सोचे! यहाँ बहुत सहायक विचार है: कभी-कभी हमारा मन एक छोटा तथ्य पकड़ता है और फिर इसे 'यह सब कुछ है!' में फुलाता है! उदाहरण: 'मैंने अपने होमवर्क में एक गलती की, तो मैं एक भयानक छात्र हूँ!' 'मेरे दोस्त ने एक बार मुझे आमंत्रित नहीं किया, तो वे मुझे बिल्कुल पसंद नहीं करते!' देखो हर एक एक छोटा टुकड़ा लेता है और इसे सब कुछ मानता है? यह तामसिक 'एक छोटी चीज़ पर फँसना' जाल है! तो जब तुम खुद को सोचते पाओ 'यह एक बुरी चीज़ का मतलब सब कुछ बुरा है!' — रुको और अपनी दृष्टि चौड़ी करो! बड़ी तस्वीर याद रखो! एक छोटा टुकड़ा वास्तविक है — पर यह पूरी कहानी नहीं!
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अध्याय सन्दर्भ
सबसे बड़ा यह अध्याय समस्त गीता का सार है: संन्यास और त्याग का भेद, गुणों के अनुसार कर्म, स्वभावज कर्तव्य, और परम उपदेश — सब कुछ भगवान के शरण हो जाओ, वे समस्त पापों से मुक्त कर देंगे।
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