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अध्याय 7 · 30 श्लोक

ज्ञानविज्ञानयोग

Jñāna Vijñāna Yoga

ज्ञान विज्ञान योग

श्रीकृष्ण अपनी पराा और अपरा प्रकृति, समस्त सृष्टि में अपनी व्याप्ति, चार प्रकार के भक्त, तथा माया द्वारा सत्य के आवरण का वर्णन करते हैं।

विषय: ईश्वर का तत्त्व और विभूति-ज्ञान

सभी श्लोक (श्लोक 1–30)