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अध्याय 7 · श्लोक 14ज्ञान विज्ञान योग

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गीता 7.14 — askgita पर Gita Verses on Surrender to God and Letting Go of Control पर पाठों में उद्धृत।

गीता 7.14 बड़ी कठिनाई और उसका उपाय बताती है: तीन गुणों से बनी यह दिव्य माया पार करना कठिन है, पर जो केवल श्रीकृष्ण की शरण लेते हैं वे इसके पार चले जाते हैं। मात्र प्रयास पर्याप्त नहीं; शरण ही तुम्हें पार ले जाती है।

श्लोक 14 / 30

दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया। मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते॥

लिप्यंतरण

daivī hyeṣhā guṇa-mayī mama māyā duratyayā mām eva ye prapadyante māyām etāṁ taranti te

शब्दार्थ (अन्वय)

daivī
divine
hi
certainly
eṣhā
this
guṇa-mayī
consisting of the three modes of nature
mama
my
māyā
one of God’s energies. It that veils God’s true nature from souls who have not yet attained the eligibility for God-realization
duratyayā
very difficult to overcome
mām
unto me
eva
certainly
ye
who
prapadyante
surrender
māyām etām
this Maya
taranti
cross over
te
they

भावार्थ

क्योंकि मेरी यह गुणमयी दैवी माया बड़ी दुरत्यय है अर्थात् इससे पार पाना बड़ा कठिन है। जो केवल मेरे ही शरण होते हैं, वे इस मायाको तर जाते हैं।

व्याख्या

यह सुप्रसिद्ध श्लोक कहता है: 'मेरी यह दैवी माया, गुणों से बनी, पार करना कठिन है। पर जो केवल मेरी शरण लेते हैं वे इस माया को पार कर जाते हैं।' श्रीकृष्ण 7.13 में वर्णित भ्रम की प्रकृति समझाते हैं और बाहर निकलने का मार्ग प्रकट करते हैं। जो शक्ति प्राणियों को मंत्रमुग्ध करती है वह है 'दैवी ... माया' — उनकी अपनी दिव्य माया, तीन गुणों से बनी अद्भुत सृजनात्मक शक्ति। श्रीकृष्ण माया को कोई स्वतंत्र दुष्ट शक्ति के रूप में प्रस्तुत नहीं करते; यह उनकी अपनी दिव्य शक्ति है। यह माया 'दुरत्यया' है — पार करना अत्यंत कठिन। पर फिर मुक्तिदायक प्रकाशन आता है: 'मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते' — जो केवल मेरी शरण लेते हैं वे इस माया को पार कर जाते हैं। कुंजी है 'प्रपद्यन्ते' — समर्पण, शरण।

भगवद्गीता 7.14 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?

श्रीकृष्ण कठिनाई और समाधान दोनों प्रकट करते हैं। भ्रम का जाल जो हमें मोहित करता है 'पार करना कठिन' है — और ईमानदारी से, केवल इच्छाशक्ति से, इतनी गहरी शक्तियों के विरुद्ध, यह लगभग हमेशा जीतता है। पर बाहर निकलने का मार्ग और अधिक मेहनत करता वीरतापूर्ण आत्म-प्रयास नहीं — यह समर्पण है, किसी बड़े में शरण लेना। यह हमारी 'बस ज़्यादा कोशिश करो' संस्कृति के लिए प्रति-सहज है। कभी-कभी सबसे गहरे पैटर्न बल से नहीं जीते जा सकते; वे समर्पण से छूटते हैं।

भगवद्गीता 7.14 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?

श्रीकृष्ण कठिनाई और सॉल्यूशन दोनों रिवील करते हैं। इल्यूज़न का वेब जो हमें कैप्टिवेट करता है 'ओवरकम करना हार्ड' है — और ईमानदारी से, रॉ विलपावर से, इतनी डीप फोर्सेज़ के विरुद्ध, यह लगभग हमेशा जीतता है। पर बाहर निकलने का रास्ता और हार्ड ग्राइंड करता हीरोइक सेल्फ-एफर्ट नहीं — यह सरेंडर है, अपने ईगो से बड़ी किसी चीज़ में रिफ्यूज लेना। यह हमारी 'बस ज़्यादा ग्राइंड करो' कल्चर के लिए काउंटरइंट्यूटिव है। रिकवरी प्रोग्राम्स ने भी यह डिस्कवर किया।

भगवद्गीता 7.14 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?

श्रीकृष्ण उस मंत्रमुग्ध करने वाली शक्ति (जिसे माया कहते हैं) के बारे में एक रहस्य साझा करते हैं जो हमें भगवान को भुला देती है। वे कहते हैं अपने दम पर इससे बचना बहुत कठिन है — यह एक शक्तिशाली जादू के मंत्र जैसा है! पर बाहर निकलने का एक अद्भुत तरीका है: बस भगवान की शरण लो, पूरे हृदय से भगवान पर भरोसा करो, और तुम इसे पार कर जाओगे! यह एक कठिन भूलभुलैया में फँसे होने जैसा है — कभी-कभी सबसे अच्छी चीज़ एक प्रेमपूर्ण मार्गदर्शक का हाथ थामना है!

सामान्य प्रश्न

भगवद्गीता 7.14 का अर्थ क्या है?

तीन गुणों से बनी श्रीकृष्ण की यह दिव्य माया पार करना कठिन है; पर जो केवल श्रीकृष्ण की शरण लेते हैं वे इसके पार चले जाते हैं। मात्र प्रयास पर्याप्त नहीं; शरण ही पार ले जाती है।

यह श्लोक किसने कहा?

भगवान श्रीकृष्ण ने, अर्जुन से, सातवें अध्याय (ज्ञान विज्ञान योग) में, शरण से माया पार करने पर।

गीता 7.14 आज के जीवन में कैसे उतारें?

कुछ भीतरी खिंचाव — गुण, गहरे संस्कार — अकेली इच्छाशक्ति से बड़े हैं। सच्चे प्रयास को स्वयं से बड़ी किसी सत्ता के प्रति विनम्र शरण से मिलाना ही उन गहराइयों को पार करता है।

सम्बंधित श्लोक

अध्याय सन्दर्भ

श्रीकृष्ण अपनी पराा और अपरा प्रकृति, समस्त सृष्टि में अपनी व्याप्ति, चार प्रकार के भक्त, तथा माया द्वारा सत्य के आवरण का वर्णन करते हैं।

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प्रामाणिक स्रोत

ये शास्त्रीय परम्पराओं और सम्बन्धित प्रकाशन-संस्थाओं की आधिकारिक वेबसाइटें हैं।