AskGita

अध्याय 7 · श्लोक 19ज्ञान विज्ञान योग

Read this verse in English
श्लोक 19 / 30

बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते। वासुदेवः सर्वमिति स महात्मा सुदुर्लभः॥

लिप्यंतरण

bahūnāṁ janmanām ante jñānavān māṁ prapadyate vāsudevaḥ sarvam iti sa mahātmā su-durlabhaḥ

शब्दार्थ (अन्वय)

bahūnām
many
janmanām
births
ante
after
jñāna-vān
one who is endowed with knowledge
mām
unto me
prapadyate
surrenders
vāsudevaḥ
Shree Krishna, the son of Vasudev
sarvam
all
iti
that
saḥ
that
mahā-ātmā
great soul
su-durlabhaḥ
very rare

भावार्थ

बहुत जन्मोंके अन्तमें अर्थात् मनुष्यजन्ममें 'सब कुछ परमात्मा ही है', ऐसा जो ज्ञानवान् मेरे शरण होता है, वह महात्मा अत्यन्त दुर्लभ है।

व्याख्या

यह प्रसिद्ध श्लोक घोषित करता है: 'अनेक जन्मों के अंत में, ज्ञानवान मेरी शरण लेता है, यह जानकर कि वासुदेव (दिव्य) सब कुछ है। ऐसा महात्मा अत्यंत दुर्लभ है।' श्रीकृष्ण लम्बी आध्यात्मिक यात्रा की पराकाष्ठा का वर्णन करते हैं। 'बहूनां जन्मनामन्ते' — अनेक जन्मों के अंत में: उच्चतम बोध आमतौर पर एक ही जीवन में नहीं बल्कि कई जीवनों भर आध्यात्मिक परिपक्वता के फल के रूप में आता है। इस अंतिम बोध की सामग्री क्या है? 'वासुदेवः सर्वम् इति' — 'वासुदेव (दिव्य) सब कुछ है।' यह सर्वोच्च अंतर्दृष्टि है: केवल यह नहीं कि भगवान है, बल्कि कि भगवान सब कुछ है। फिर श्रीकृष्ण जोड़ते हैं: 'स महात्मा सुदुर्लभः' — ऐसा महात्मा अत्यंत दुर्लभ है।

भगवद्गीता 7.19 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?

यह श्लोक लम्बे खेल का सम्मान करता है। श्रीकृष्ण कहते हैं उच्चतम बोध 'अनेक जन्मों के अंत में' आता है — यह एक लम्बी, धैर्यपूर्ण यात्रा का फल है, त्वरित जीत नहीं। और उस अंतिम बोध की सामग्री लुभावनी है: 'दिव्य सब कुछ है।' केवल यह नहीं कि भगवान कहीं है, बल्कि कि जो कुछ तुम देखते, छूते और हो वह गहनतम स्तर पर पवित्र है। हमारे लिए प्रोत्साहन: सबसे गहरे बोध रातोंरात मत अपेक्षित करो — सबसे महान चीज़ें धीरे पकती हैं। और जिस दृष्टि की ओर इशारा है वह सबसे विस्तृत सम्भव है।

भगवद्गीता 7.19 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?

यह श्लोक लॉन्ग गेम को हार्ड ऑनर करता है। श्रीकृष्ण कहते हैं हाईएस्ट रियलाइज़ेशन 'अनेक जन्मों के अंत में' आती है — यह एक लम्बी, पेशेंट जर्नी का फ्रूट है, क्विक विन नहीं। और उस फाइनल रियलाइज़ेशन का कंटेंट ब्रेथटेकिंग है: 'डिवाइन सब कुछ है।' सिर्फ यह नहीं कि गॉड कहीं है, बल्कि कि जो कुछ तुम देखते, छूते और हो वह डीपेस्ट लेवल पर सेक्रेड है। एनकरेजमेंट: डीपेस्ट रियलाइज़ेशन्स ओवरनाइट एक्सपेक्ट मत करो — सबसे महान चीज़ें धीरे राइपन होती हैं।

भगवद्गीता 7.19 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?

श्रीकृष्ण आध्यात्मिक यात्रा का सबसे अद्भुत गंतव्य साझा करते हैं! वे कहते हैं कई, कई जीवनों के बढ़ने के बाद, बुद्धिमान व्यक्ति अंततः सबसे बड़ा सच समझता है: 'भगवान सब कुछ है!' केवल यह नहीं कि भगवान ने सब बनाया, बल्कि कि भगवान सब चीज़ों में और सब चीज़ों के रूप में उपस्थित हैं! और श्रीकृष्ण कहते हैं ऐसा बुद्धिमान, महान आत्मा बहुत दुर्लभ और बहुमूल्य है। सबक: सबसे गहरी समझ बढ़ने में समय और धैर्य लेती है!

सम्बंधित श्लोक

अध्याय सन्दर्भ

श्रीकृष्ण अपनी पराा और अपरा प्रकृति, समस्त सृष्टि में अपनी व्याप्ति, चार प्रकार के भक्त, तथा माया द्वारा सत्य के आवरण का वर्णन करते हैं।

अध्याय पढ़ें