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अध्याय 8 · 28 श्लोक

अक्षरब्रह्मयोग

Akṣara Brahma Yoga

अक्षरब्रह्म योग

श्रीकृष्ण ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म आदि की परिभाषा देते हैं और बताते हैं कि अन्तकाल का स्मरण अगली गति निर्धारित करता है। शुक्ल और कृष्ण मार्ग तथा निरंतर ईश्वर-स्मरण का महत्त्व बताया गया है।

विषय: ब्रह्म, अन्तकाल और मृत्यु के बाद की गति

सभी श्लोक (श्लोक 1–28)