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अध्याय 7 · श्लोक 29ज्ञान विज्ञान योग

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श्लोक 29 / 30

जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये। ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम्॥

लिप्यंतरण

jarā-maraṇa-mokṣhāya mām āśhritya yatanti ye te brahma tadviduḥ kṛitsnam adhyātmaṁ karma chākhilam

शब्दार्थ (अन्वय)

jarā
from old age
maraṇa
and death
mokṣhāya
for liberation
mām
me
āśhritya
take shelter in
yatanti
strive
ye
who
te
they
brahma
Brahman
tat
that
viduḥ
know
kṛitsnam
everything
adhyātmam
the individual self
karma
karmic action
cha
and
akhilam
entire

भावार्थ

जरा (वृद्धावस्था) और मरण (मृत्यु) से मोक्ष पानेके लिये जो मेरा आश्रय लेकर प्रयत्न करते हैं, वे उस ब्रह्मको, सम्पूर्ण अध्यात्मको और सम्पूर्ण कर्मको भी जान जाते हैं।

व्याख्या

"जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये, ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम्।" — जो बुढ़ापे और मृत्यु से मुक्ति के लिए मेरा आश्रय लेकर प्रयास करते हैं, वे उस ब्रह्म, सम्पूर्ण अध्यात्म और सम्पूर्ण कर्म को जानते हैं। श्रीकृष्ण उनका वर्णन करते हैं जो मुक्ति के लक्ष्य से उनकी शरण लेते हैं, और जो व्यापक ज्ञान वे इस प्रकार प्राप्त करते हैं। वे 'जरामरणमोक्षाय' प्रयास करते हैं — बुढ़ापे (जरा) और मृत्यु (मरण) से मुक्ति (मोक्ष) के लिए। और वे 'मामाश्रित्य' ऐसा करते हैं — श्रीकृष्ण की शरण लेकर। इस ईश्वर-आधारित प्रयास का फल: वे ब्रह्म को पूर्णतः जानते हैं, अध्यात्म (आंतरिक स्व), और कर्म को पूर्णतः। दिव्य की शरण के माध्यम से, सबसे गहरे सत्य ज्ञात होते हैं। मुख्य शिक्षा: दिव्य की शरण पूर्ण ज्ञान का द्वार है। सर्वोच्च का लक्ष्य रखो, और बुद्धि की पूर्णता अनुसरण करती है।

भगवद्गीता 7.29 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?

श्रीकृष्ण उनका वर्णन करते हैं जो दिव्य की ओर छोटे उपकारों के लिए नहीं बल्कि परम मुक्ति के लिए मुड़ते हैं — क्षय और मृत्यु से स्वतंत्रता — और कहते हैं वे सबसे गहरी वास्तविकताओं को पूर्णतः जानने आते हैं। निकालने योग्य सिद्धांत: सर्वोच्च का लक्ष्य रखो, और पूर्णता अनुसरण करती है। जब तुम अपनी खोज को सबसे मौलिक प्रश्नों की ओर उन्मुख करते हो — केवल छोटी जीतों की बजाय — तुम रास्ते में सब कुछ खोज लेते हो, क्योंकि उच्चतम लक्ष्य सब छोटे को समाहित करता है। गहरा लक्ष्य रखो, और व्यापकता साथ आती है।

भगवद्गीता 7.29 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?

श्रीकृष्ण उनका वर्णन करते हैं जो डिवाइन की ओर स्मॉल फेवर्स के लिए नहीं बल्कि अल्टिमेट लिबरेशन के लिए मुड़ते हैं — डिके और डेथ से फ्रीडम — और कहते हैं वे डीपेस्ट रियलिटीज़ को पूरी तरह जानने आते हैं। प्रिंसिपल: हाईएस्ट का एम करो, और फुलनेस फॉलो करती है। जब तुम अपनी सीकिंग को सबसे फंडामेंटल सवालों की ओर ओरिएंट करते हो, तुम रास्ते में सब कुछ डिस्कवर करते हो। डीप एम करो, और ब्रेड्थ फ्री में आती है।

भगवद्गीता 7.29 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?

श्रीकृष्ण विशेष लोगों का वर्णन करते हैं जो भगवान की ओर छोटी इच्छाओं के लिए नहीं बल्कि सबसे बड़ी स्वतंत्रता पाने के लिए मुड़ते हैं — बूढ़े होने, बीमार होने और डरने से स्वतंत्रता! और वे कहते हैं: क्योंकि वे सबसे ऊँचे लक्ष्य का लक्ष्य रखते हैं, वे सब कुछ गहरा और महत्त्वपूर्ण समझ लेते हैं — भगवान के बारे में, आत्मा के बारे में, और कर्म कैसे काम करते हैं! सबक बढ़िया है: जब तुम सबसे अच्छी चीज़ के लिए पहुँचते हो, तुम रास्ते में बहुत कुछ सीखते हो!

सम्बंधित श्लोक

अध्याय सन्दर्भ

श्रीकृष्ण अपनी पराा और अपरा प्रकृति, समस्त सृष्टि में अपनी व्याप्ति, चार प्रकार के भक्त, तथा माया द्वारा सत्य के आवरण का वर्णन करते हैं।

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