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अध्याय 4 · 42 श्लोक

ज्ञानकर्मसंन्यासयोग

Jñāna Karma Sannyāsa Yoga

ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्रीकृष्ण इस योग की परम्परा और अवतार के सिद्धांत का वर्णन करते हैं — धर्म की स्थापना हेतु युग-युग में अवतरण। कर्म में अकर्म, विविध यज्ञ तथा ज्ञानयज्ञ की श्रेष्ठता बताई गई है।

विषय: अवतार, ज्ञान और ज्ञानयज्ञ

सभी श्लोक (श्लोक 1–42)