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अध्याय 3 · 43 श्लोक

कर्मयोग

Karma Yoga

कर्म योग

श्रीकृष्ण बताते हैं कि कर्म अनिवार्य है और अकर्म से श्रेष्ठ है। स्वधर्म का आसक्तिरहित पालन, यज्ञचक्र, तथा काम और क्रोध को साधक के शत्रु बताया गया है।

विषय: मोक्ष के साधन रूप में निष्काम कर्म

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