AskGita

अध्याय 8 · श्लोक 26अक्षरब्रह्म योग

Read this verse in English
श्लोक 26 / 28

शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते। एकया यात्यनावृत्तिमन्ययाऽऽवर्तते पुनः॥

लिप्यंतरण

śhukla-kṛiṣhṇe gatī hyete jagataḥ śhāśhvate mate ekayā yātyanāvṛittim anyayāvartate punaḥ

शब्दार्थ (अन्वय)

śhukla
bright
kṛiṣhṇe
dark
gatī
paths
hi
certainly
ete
these
jagataḥ
of the material world
śhāśhvate
eternal
mate
opinion
ekayā
by one
yāti
goes
anāvṛittim
to non return
anyayā
by the other
āvartate
comes back
punaḥ
again

भावार्थ

क्योंकि शुक्ल और कृष्ण -- ये दोनों गतियाँ अनादिकालसे जगत्-(प्राणिमात्र-) के साथ सम्बन्ध रखनेवाली मानी गई हैं। इनमेंसे एक गतिमें जानेवालेको लौटना नहीं पड़ता और दूसरी गतिमें जानेवालेको लौटना पड़ता है।

व्याख्या

"शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते, एकया यात्यनावृत्तिमन्ययावर्तते पुनः।" — संसार के ये दो पथ, शुक्ल और कृष्ण, शाश्वत माने जाते हैं। एक से मनुष्य अनावृत्ति को जाता है; दूसरे से फिर लौटता है। श्रीकृष्ण 8.24-25 की शिक्षा का सारांश देते हैं। 'शुक्लकृष्णे गती हि एते' — ये दो पथ, शुक्ल और कृष्ण, 'जगतः शाश्वते मते' — संसार के शाश्वत मार्ग माने जाते हैं। भेद स्पष्ट है: 'एकया यात्यनावृत्तिम्' — एक से (उज्ज्वल पथ), मनुष्य अनावृत्ति (मुक्ति) को जाता है; 'अन्यया आवर्तते पुनः' — दूसरे से (अंधकार पथ), फिर लौटता है। यह श्लोक उस चुनाव को स्पष्ट करता है जिसे पूरा अध्याय प्रकाशित कर रहा है। मौलिक रूप से दो दिशाएँ हैं। शिक्षा भाग्यवादी नहीं है — कौन सा पथ कोई लेता है यह इस पर निर्भर है कि कैसे जीवन उन्मुख किया।

भगवद्गीता 8.26 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?

श्रीकृष्ण पूरी शिक्षा को एक स्पष्ट चुनाव में स्पष्ट करते हैं: दो शाश्वत पथ, एक स्वतंत्रता की ओर और एक वापसी की ओर। महत्त्वपूर्ण रूप से, यह भाग्यवादी नहीं है — तुम कौन सा पथ यात्रा करते हो यह इससे आकार लेता है कि तुमने अपना जीवन कैसे उन्मुख किया। सिद्धांत एक तीखा जीवन-सत्य है: किसी भी क्षण, तुम्हारी दिशा मौलिक रूप से दो में से एक है — अधिक स्वतंत्रता की ओर, या वापस उन्हीं पुराने चक्रों में। कोई तटस्थ स्थिर खड़ा होना नहीं। सशक्त करने वाला हिस्सा: यह पूर्वनिर्धारित नहीं। पूछो: मैं अभी किस ओर जा रहा हूँ?

भगवद्गीता 8.26 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?

श्रीकृष्ण पूरी टीचिंग को एक क्लियर चॉइस में क्रिस्टलाइज़ करते हैं: दो इटरनल पाथ्स, एक फ्रीडम की ओर और एक वापस साइकिल में। क्रूशियली, यह फेटलिस्टिक नहीं — तुम कौन सा पाथ ट्रैवल करते हो वह इससे शेप होता है कि तुमने अपनी लाइफ कैसे ओरिएंट की। प्रिंसिपल शार्प लाइफ-ट्रुथ है: किसी भी मोमेंट, तुम्हारी डायरेक्शन फंडामेंटली दो में से एक है — ज़्यादा फ्रीडम की ओर, या वापस पुराने लूप्स में। कोई न्यूट्रल 'स्टैंडिंग स्टिल' नहीं। एम्पावरिंग पार्ट: यह प्रीडिटरमिन्ड नहीं। पूछो: मैं अभी किस ओर जा रहा हूँ?

भगवद्गीता 8.26 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?

श्रीकृष्ण दो पथों का सरलता से सारांश देते हैं: एक उज्ज्वल पथ जो स्वतंत्रता की ओर ले जाता है (कभी संघर्षों में वापस न आना), और एक अंधेरा पथ जो फिर जन्म लेने की ओर ले जाता है। और यहाँ सशक्त करने वाला हिस्सा है — तुम कौन सा पथ लेते हो यह तुम्हारे लिए तय नहीं किया गया! यह इस पर निर्भर है कि तुम कैसे जीते हो! यह एक चौराहे पर खड़े होने जैसा है: एक रास्ता सुंदर पर्वत-शिखर तक ले जाता है, दूसरा वापस शुरुआत में। अद्भुत खबर है तुम अपनी दिशा चुन सकते हो!

सम्बंधित श्लोक

अध्याय सन्दर्भ

श्रीकृष्ण ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म आदि की परिभाषा देते हैं और बताते हैं कि अन्तकाल का स्मरण अगली गति निर्धारित करता है। शुक्ल और कृष्ण मार्ग तथा निरंतर ईश्वर-स्मरण का महत्त्व बताया गया है।

अध्याय पढ़ें