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अध्याय 8 · श्लोक 13अक्षरब्रह्म योग

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श्लोक 13 / 28

ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन्। यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्॥

लिप्यंतरण

oṁ ityekākṣharaṁ brahma vyāharan mām anusmaran yaḥ prayāti tyajan dehaṁ sa yāti paramāṁ gatim

शब्दार्थ (अन्वय)

om
sacred syllable representing the formless aspect of God
iti
thus
eka-akṣharam
one syllabled
brahma
the Absolute Truth
vyāharan
chanting
mām
me (Shree Krishna)
anusmaran
remembering
yaḥ
who
prayāti
departs
tyajan
quitting
deham
the body
saḥ
he
yāti
attains
paramām
the supreme
gatim
goal

भावार्थ

(इन्द्रियोंके) सम्पूर्ण द्वारोंको रोककर मनका हृदयमें निरोध करके और अपने प्राणोंको मस्तकमें स्थापित करके योगधारणामें सम्यक् प्रकारसे स्थित हुआ जो साधक 'ऊँ' इस एक अक्षर ब्रह्मका उच्चारण और मेरा स्मरण करता हुआ शरीरको छोड़कर जाता है, वह परमगतिको प्राप्त होता है।

व्याख्या

यह प्रसिद्ध श्लोक कहता है: 'ॐ इस एक अक्षर ब्रह्म का उच्चारण करते हुए, मुझे स्मरण करते हुए, जो कोई शरीर त्यागकर जाता है, वह परम गति को प्राप्त करता है।' श्रीकृष्ण समापन निर्देश देते हैं, 8.12 में शुरू तकनीक को पूरा करते हुए। अभ्यास के तीन एकीकृत तत्त्व हैं। 'ॐ इति एकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्' — ॐ इस एक अक्षर का उच्चारण, जो ध्वनि-रूप में ब्रह्म ही है। 'मां अनुस्मरन्' — मुझे स्मरण करते हुए। 'यः प्रयाति त्यजन्देहम्' — जो कोई शरीर त्यागकर जाता है। परिणाम: 'स याति परमां गतिम्' — वह परम गति प्राप्त करता है। शंकराचार्य एकीकरण समझाते हैं: पवित्र अक्षर ॐ का उच्चारण किया जाता है जबकि मन साथ ही अर्थ — दिव्य स्वयं — स्मरण करता है। ध्वनि और उसका अर्थ एक होते हैं। यह श्लोक मृत्यु पर अध्याय की केंद्रीय शिक्षा पूरा करता है।

भगवद्गीता 8.13 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?

ॐ — परम्परा में सबसे पवित्र ध्वनि — यहाँ अंतिम क्षण स्मरण के लिए मौखिक लंगर के रूप में प्रकट होता है। गहरा सिद्धांत ध्यान देने योग्य है: एक ध्वनि, शब्द, या वाक्यांश, दोहराया और अर्थ से भरा, मन के लिए एक शक्तिशाली लंगर बन सकता है। यह अब अच्छी तरह समझा जाता है: एक मंत्र, एक सार्थक वाक्यांश, लगातार दोहराया, एक विश्वसनीय हैंडल बन जाता है जिसे मन पकड़ सकता है, विशेषकर तनाव में। बिंदु एक विशेष अक्षर का जादू नहीं — यह कि तुम एक ध्वनि-और-अर्थ संयोजन को इतनी गहराई से प्रशिक्षित कर सकते हो कि यह स्वतः उपलब्ध हो।

भगवद्गीता 8.13 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?

ॐ — परम्परा में सबसे सेक्रेड साउंड — यहाँ फाइनल मोमेंट रिमेम्ब्रेंस के लिए वर्बल एंकर के रूप में दिखता है। डीपर प्रिंसिपल नोट करने योग्य है: एक साउंड, वर्ड, या फ्रेज़, रिपीटेड और मीनिंग से इन्फ्यूज्ड, माइंड के लिए पावरफुल एंकर बन सकता है। यह अब वेल अंडरस्टुड है: एक मंत्र, एक मीनिंगफुल फ्रेज़, कंसिस्टेंटली रिपीटेड, एक रिलायबल हैंडल बन जाता है। एथलीट्स क्यू वर्ड्स यूज़ करते हैं। पेयर ए मीनिंगफुल साउंड विद सिन्सियर फोकस।

भगवद्गीता 8.13 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?

श्रीकृष्ण विशेष पवित्र ध्वनि साझा करते हैं: 'ॐ'! यह सबसे पवित्र ध्वनि है, जो भगवान का ही प्रतिनिधित्व करती है। वे सिखाते हैं कि जो कोई प्यार से भगवान को याद करते हुए 'ॐ' कहता है वह सर्वोच्च लक्ष्य तक पहुँचता है! इसके पीछे का मज़ेदार विचार: एक विशेष ध्वनि या शब्द, अर्थ के साथ दोहराया, एक लंगर बन सकता है जो तुम्हारे मन को शांत और स्थिर करता है। यह एक जादुई शांत करने वाला शब्द रखने जैसा है जिस पर तुम हमेशा वापस आ सकते हो!

सम्बंधित श्लोक

अध्याय सन्दर्भ

श्रीकृष्ण ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म आदि की परिभाषा देते हैं और बताते हैं कि अन्तकाल का स्मरण अगली गति निर्धारित करता है। शुक्ल और कृष्ण मार्ग तथा निरंतर ईश्वर-स्मरण का महत्त्व बताया गया है।

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