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अध्याय 15 · 20 श्लोक

पुरुषोत्तमयोग

Puruṣottama Yoga

पुरुषोत्तम योग

संसार को उल्टे अश्वत्थ वृक्ष के रूप में बताकर श्रीकृष्ण वैराग्यरूपी कुल्हाड़ी से उसे काटना सिखाते हैं। वे स्वयं को क्षर और अक्षर से परे पुरुषोत्तम के रूप में प्रकट करते हैं।

विषय: संसार-वृक्ष और पुरुषोत्तम

सभी श्लोक (श्लोक 1–20)