अध्याय 5 · श्लोक 25— कर्म संन्यास योग
Read this verse in English →गीता 5.25 बताती है कि वह मुक्ति कौन पाता है: जिन ऋषियों के दोष चले गए, द्वंद्व कट गया, जो आत्मा को साधे रखते हैं और सब प्राणियों के हित में आनंद पाते हैं — वे ब्रह्म-निर्वाण पाते हैं। सबके भले के लिए कर्म स्वयं घर का मार्ग है।
लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः। छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः॥
लिप्यंतरण
labhante brahma-nirvāṇam ṛiṣhayaḥ kṣhīṇa-kalmaṣhāḥ chhinna-dvaidhā yatātmānaḥ sarva-bhūta-hite ratāḥ
शब्दार्थ (अन्वय)
- labhante
- — achieve
- brahma-nirvāṇam
- — liberation from material existence
- ṛiṣhayaḥ
- — holy persons
- kṣhīṇa-kalmaṣhāḥ
- — whose sins have been purged
- chhinna
- — annihilated
- dvaidhāḥ
- — doubts
- yata-ātmānaḥ
- — whose minds are disciplined
- sarva-bhūta
- — for all living entities
- hite
- — in welfare work
- ratāḥ
- — rejoice
भावार्थ
जिनका शरीर मन-बुद्धि-इन्द्रियोंसहित वशमें है, जो सम्पूर्ण प्राणियोंके हितमें रत हैं, जिनके सम्पूर्ण संशय मिट गये हैं, जिनके सम्पूर्ण कल्मष (दोष) नष्ट हो गये हैं, वे विवेकी साधक निर्वाण ब्रह्मको प्राप्त होते हैं।
व्याख्या
"लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः, छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः।" — जिन ऋषियों के कल्मष नष्ट, जिनके संशय काटे, जो यतात्मा, जो सब भूतों के हित में रत — वे ब्रह्मनिर्वाण पाते हैं। ब्रह्मनिर्वाण पाने वालों के चार गुण: (1) क्षीणकल्मषाः — कल्मष नष्ट; (2) छिन्नद्वैधाः — संशय काटे; (3) यतात्मानः — आत्म-संयमी; (4) सर्वभूतहिते रताः — सब प्राणियों के हित में रत। चौथा गुण विशेष रूप से उल्लेखनीय है: सब प्राणियों का हित। ब्रह्मनिर्वाण दूसरों की चिंता से पीछे हटने का फल नहीं — यह उन्हें प्राप्त होता है जो सार्वभौमिक कल्याण में सक्रिय रूप से प्रसन्न हैं। यह ज्ञान और कर्म के गीता के एकीकरण के अनुरूप है।
भगवद्गीता 5.25 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?
शुद्ध कल्मष और काटे संशय के साथ 'सब प्राणियों का हित' को उच्चतम मुक्ति की शर्त के रूप में सम्मिलित करना महत्त्वपूर्ण है। इसका अर्थ है मुक्ति एक निजी, एकाकी उपलब्धि नहीं है। सार्वभौमिक देखभाल की गुणवत्ता — वास्तव में सब प्राणियों के कल्याण में प्रसन्न होना — उस मुक्त अवस्था का हिस्सा है जो गठित करती है। यह गीता के दृष्टिकोण को स्वाभाविक रूप से सामाजिक बनाता है।
भगवद्गीता 5.25 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?
भगवद्गीता 5.25 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?
उच्चतम शान्ति तक पहुँचने के लिए चार चीज़ें मदद करती हैं: अंदर से शुद्ध होना, संशय साफ होना, खुद पर नियंत्रण — और जब सब जीव खुश हों तो सच में परवाह करना और खुश होना! आखिरी सुंदर है: वास्तविक बुद्धि तुम्हें सबकी परवाह कराती है।
सामान्य प्रश्न
भगवद्गीता 5.25 का अर्थ क्या है?
जिन ऋषियों के दोष चले गए, द्वंद्व कट गया, जो आत्मा को साधे रखते हैं और सब प्राणियों के हित में आनंद पाते हैं वे ब्रह्म-निर्वाण, ब्रह्म में मुक्ति, पाते हैं। सबके भले के लिए कर्म स्वयं घर का मार्ग है।
यह श्लोक किसने कहा?
भगवान श्रीकृष्ण ने, अर्जुन से, पाँचवें अध्याय (कर्म संन्यास योग) में, ब्रह्म-निर्वाण का मार्ग बताते हुए।
गीता 5.25 आज के जीवन में कैसे उतारें?
सच्ची आध्यात्मिक परिपक्वता दूसरों के कल्याण में आनंद के रूप में प्रकट होती है। सबके भले की परवाह गहरी स्वतंत्रता का सीधा मार्ग है।
सम्बंधित श्लोक
अध्याय सन्दर्भ
श्रीकृष्ण संन्यास और कर्मयोग में समन्वय करते हैं — दोनों एक ही लक्ष्य तक पहुँचाते हैं, पर निष्काम कर्म सुगम है। ज्ञानी कमलपत्र की भाँति अनासक्त रहकर कर्म करता है।
अध्याय पढ़ें →✦ प्रामाणिक स्रोत ✦
ये शास्त्रीय परम्पराओं और सम्बन्धित प्रकाशन-संस्थाओं की आधिकारिक वेबसाइटें हैं।
Bhagavad Gita 5.25 — Vedabase (Bhaktivedanta)
Vedabase's edition of Bhagavad Gita 5.25 with Sanskrit, transliteration, word-for-word, translation and Prabhupāda's purport.
Bhaktivedanta Vedabase →
Gita Press, Gorakhpur
Publisher of the Hindi translation of the Bhagavad Gita by Swami Ramsukhdas cited on this site.
Gita Press →
Chinmaya Mission
Chinmaya Mission — Swami Chinmayananda's organisation, whose Bhagavad Gita commentary is cited on this site.
Chinmaya Mission →