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अध्याय 10 · श्लोक 4विभूति योग

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श्लोक 4 / 42

बुद्धिर्ज्ञानमसंमोहः क्षमा सत्यं दमः शमः। सुखं दुःखं भवोऽभावो भयं चाभयमेव च॥

लिप्यंतरण

buddhir jñānam asammohaḥ kṣhamā satyaṁ damaḥ śhamaḥ sukhaṁ duḥkhaṁ bhavo ’bhāvo bhayaṁ chābhayameva cha

शब्दार्थ (अन्वय)

buddhiḥ
intellect
jñānam
knowledge
asammohaḥ
clarity of thought
kṣhamā
forgiveness
satyam
truthfulness
damaḥ
control over the senses
śhamaḥ
control of the mind
sukham
joy
duḥkham
sorrow
bhavaḥ
birth
abhāvaḥ
death
bhayam
fear
cha
and
abhayam
courage
eva
certainly
cha
and

भावार्थ

बुद्धि, ज्ञान, असम्मोह, क्षमा, सत्य, दम, शम, सुख, दुःख, भव, अभाव, भय, अभय, अहिंसा, समता, तुष्टि, तप, दान, यश और अपयश -- प्राणियोंके ये अनेक प्रकारके और अलग-अलग (बीस) भाव मेरेसे ही होते हैं।

व्याख्या

श्रीकृष्ण उन गुणों की सूची शुरू करते हैं जो उनसे उत्पन्न होते हैं (10.5 में जारी): 'बुद्धि, ज्ञान, असम्मोह, क्षमा, सत्य, दम, शम, सुख, दुख, उत्पत्ति, मृत्यु, भय, और अभय...' श्रीकृष्ण प्रकट करते हैं कि प्राणियों में पाए जाने वाले सब विविध गुण और अवस्थाएँ उनसे ही उत्पन्न होती हैं। यह श्लोक सूची शुरू करता है: 'बुद्धिः' (बुद्धि), 'ज्ञानम्' (ज्ञान), 'असम्मोहः' (असम्मोह), 'क्षमा' (क्षमा), 'सत्यम्' (सत्य), 'दमः' (दम), 'शमः' (शांति), 'सुखम्' (सुख), 'दुःखम्' (दुख), 'भयम्' (भय), 'अभयम्' (अभय)। शंकराचार्य पूर्णता पर ध्यान देते हैं, और विशेष रूप से विपरीतों का समावेश। ये सब — मानव अनुभव की पूरी श्रृंखला — एक दिव्य स्रोत से उत्पन्न होती हैं। जो अच्छे गुण तुम चाहते हो वे पहले से तुम्हारे अस्तित्व की दिव्य भूमि में बीजित हैं।

भगवद्गीता 10.4 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?

श्रीकृष्ण प्रकट करते हैं कि प्राणियों में पाए जाने वाले सब गुण — बुद्धि, ज्ञान, धैर्य, सत्यता, शांति, और यहाँ तक कि भय, दर्द भी — एक दिव्य स्रोत से उत्पन्न होते हैं। व्यावहारिक सबक प्रोत्साहनजनक है: जो गुण तुम सबसे ज़्यादा विकसित करना चाहते हो वे तुम्हारे लिए विदेशी या असम्भव रूप से दूर नहीं। वे उसी स्रोत से उत्पन्न होते हैं जो तुम्हारी अपनी गहनतम प्रकृति है। यह आत्म-सुधार को पुनः तैयार करता है: तुम कुछ विदेशी निर्मित नहीं कर रहे — तुम जो पहले से तुम्हारे गहनतम अस्तित्व में बीजित है उसे अभिव्यक्त होने दे रहे हो। तुम में जो अच्छा पहले से बीजित है उसे बढ़ाओ।

भगवद्गीता 10.4 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?

श्रीकृष्ण रिवील करते हैं कि बीइंग्स में पाई जाने वाली सब क्वालिटीज़ — इंटेलिजेंस, नॉलेज, पेशेंस, ट्रुथफुलनेस, काम, AND यहाँ तक कि फियर, पेन भी — एक डिवाइन सोर्स से अराइज़ होती हैं। प्रैक्टिकल टेकअवे एनकरेजिंग है: जो वर्च्यूज़ तुम सबसे ज़्यादा बिल्ड करना चाहते हो वे तुम्हारे लिए फॉरेन या इम्पॉसिबली दूर नहीं। वे उसी सोर्स से अराइज़ होती हैं जो तुम्हारी अपनी डीपेस्ट नेचर है। तुम कुछ एलियन मैन्युफैक्चर नहीं कर रहे — तुम जो पहले से तुम्हारे डीपेस्ट बीइंग में सीडेड है उसे एक्सप्रेस होने दे रहे हो। तुम में जो गुड पहले से सीडेड है उसे ग्रो करो।

भगवद्गीता 10.4 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?

श्रीकृष्ण एक अद्भुत सूची साझा करना शुरू करते हैं — वे कहते हैं लोगों के पास जो सब गुण हैं वे उनसे आते हैं! समझदार होना, धैर्यवान होना, सच्चा होना, शांत और बहादुर होना जैसी चीज़ें! (और भय और उदासी जैसी कठिन भावनाएँ भी बड़ी तस्वीर से आती हैं।) यहाँ प्रोत्साहनजनक हिस्सा है: जो अच्छे गुण तुम बढ़ाना चाहते हो — धैर्य, साहस, ईमानदारी, दया, शांति — वे पहले से तुम्हारे अंदर हैं, बीजों की तरह! तो धैर्यवान या बहादुर बनना कुछ अजीब और दूर जोड़ना नहीं — यह बस उन अच्छे बीजों को बढ़ने में मदद करना है जो पहले से तुम में हैं! बस उन बीजों को अभ्यास से सींचो!

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अध्याय सन्दर्भ

श्रीकृष्ण अपनी दिव्य विभूतियों का वर्णन करते हैं — वे प्रत्येक श्रेणी में श्रेष्ठ और सार रूप हैं। उन्हें सबका मूल जानकर भक्त का प्रेम पूर्ण समर्पण में बदल जाता है।

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