AskGita

अध्याय 6 · श्लोक 26आत्मसंयम योग (ध्यान योग)

Read this verse in English
श्लोक 26 / 47

यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम्। ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत्॥

लिप्यंतरण

yato yato niśhcharati manaśh chañchalam asthiram tatas tato niyamyaitad ātmanyeva vaśhaṁ nayet

शब्दार्थ (अन्वय)

yataḥ yataḥ
whenever and wherever
niśhcharati
wanders
manaḥ
the mind
chañchalam
restless
asthiram
unsteady
tataḥ tataḥ
from there
niyamya
having restrained
etat
this
ātmani
on God
eva
certainly
vaśham
control
nayet
should bring

भावार्थ

यह अस्थिर और चञ्चल मन जहाँ-जहाँ विचरण करता है, वहाँ-वहाँसे हटाकर इसको एक परमात्मामें ही लगाये।

व्याख्या

"यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम्, ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत्।" — चंचल, अस्थिर मन जहाँ-जहाँ भटकता है, वहाँ-वहाँ से इसे संयमित करके आत्मा के वश में लाए। श्रीकृष्ण पूरे ध्यान खंड में शायद सबसे सीधे उपयोगी निर्देश देते हैं — एक श्लोक में पूर्ण तकनीक। वे अपरिहार्य वास्तविकता स्वीकार करते हैं: मन 'चञ्चलमस्थिरम्,' स्वभाव से बेचैन और अस्थिर है। यह भटकेगा। यह विफलता के रूप में नहीं बल्कि सरल तथ्य के रूप में। विधि सुंदर रूप से सरल और अनंत रूप से दोहराने योग्य है: 'यतो यतो ... ततस्ततः' — जहाँ से भी यह भटके, वहाँ से इसे वापस लाओ। शंकराचार्य इसकी निरंतर, दोहराव प्रकृति पर बल देते हैं: यह एक बार नहीं बल्कि बार-बार किया जाता है। प्रत्येक वापसी स्वयं वह अभ्यास है जो मन की स्थिरता मज़बूत करता है।

भगवद्गीता 6.26 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?

यह अब तक दिया गया सबसे उपयोगी ध्यान निर्देश है, और यह 5000 साल पुराना है: तुम्हारा मन भटकेगा ही — इसे स्वीकार करो — और हर बार जब यह भटके, धीरे से नोटिस करो और वापस लाओ। यही पूरा अभ्यास है। श्रीकृष्ण स्पष्ट कहते हैं मन स्वभाव से बेचैन है; भटकना विफलता नहीं। हर एक वापसी ही वह रेप है जो फोकस बनाता है। अगर तुम ध्यान में 'बार-बार विचलित होते रहते हो' — बधाई, तुम इसे बिल्कुल सही कर रहे हो!

भगवद्गीता 6.26 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?

यह अब तक का सबसे यूज़फुल मेडिटेशन इंस्ट्रक्शन है — और यह 5000 साल पुराना है: तुम्हारा माइंड वांडर करेगा ही, इसे एक्सेप्ट करो, और हर बार जब करे, जेंटली नोटिस करो और वापस लाओ। यही पूरा प्रैक्टिस है। श्रीकृष्ण सीधे कहते हैं माइंड नेचर से रेस्टलेस है — वांडरिंग फेलियर नहीं। हर रिटर्न वह रेप है जो फोकस बनाता है। तो अगर तुम मेडिटेशन में 'बार-बार डिस्ट्रैक्ट होते रहते हो'? कॉन्ग्रैट्स, तुम इसे परफेक्टली कर रहे हो!

भगवद्गीता 6.26 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?

श्रीकृष्ण अब तक का सबसे सरल ध्यान सुझाव देते हैं: जब भी तुम्हारा मन दूसरी चीज़ों के बारे में सोचने भाग जाए, बस उसे धीरे से वापस लाओ! तुम्हारा मन स्वाभाविक रूप से चंचल है और भटकना पसंद करता है — यह बिल्कुल सामान्य और ठीक है। अभ्यास बस यह नोटिस करना है 'अरे, मेरा मन भटक गया' और प्यार से इसे वापस लाना, बार-बार। हर बार जब तुम इसे वापस लाते हो, तुम्हारा मन थोड़ा मज़बूत होता है!

सम्बंधित श्लोक

अध्याय सन्दर्भ

श्रीकृष्ण ध्यान की विधि — आसन, स्थान, संयमित जीवन और चंचल मन को स्थिर करने का उपाय बताते हैं। वे आश्वासन देते हैं कि किसी का भी शुभ प्रयास व्यर्थ नहीं जाता।

अध्याय पढ़ें