AskGita

अध्याय 10 · श्लोक 26विभूति योग

Read this verse in English
श्लोक 26 / 42

अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः। गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः॥

लिप्यंतरण

aśhvatthaḥ sarva-vṛikṣhāṇāṁ devarṣhīṇāṁ cha nāradaḥ gandharvāṇāṁ chitrarathaḥ siddhānāṁ kapilo muniḥ

शब्दार्थ (अन्वय)

aśhvatthaḥ
the banyan tree
sarva-vṛikṣhāṇām
amongst all trees
deva-ṛiṣhīṇām
amongst celestial sages
cha
and
nāradaḥ
Narad
gandharvāṇām
amongst the gandharvas
chitrarathaḥ
Chitrarath
siddhānām
of all those who are perfected
kapilaḥ muniḥ
sage Kapil

भावार्थ

सम्पूर्ण वृक्षोंमें पीपल, देवर्षियोंमें नारद, गन्धर्वोंमें चित्ररथ और सिद्धोंमें कपिल मुनि मैं हूँ।

व्याख्या

"अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः, गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः।" — सब वृक्षों में मैं अश्वत्थ हूँ; देवर्षियों में मैं नारद हूँ; गन्धर्वों में मैं चित्ररथ हूँ; सिद्धों में मैं कपिल मुनि हूँ। श्रीकृष्ण विविध श्रेणियों में अपनी विभूतियों का नाम लेना जारी रखते हैं। 'अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम्' — सब वृक्षों में, मैं अश्वत्थ हूँ। 'देवर्षीणां च नारदः' — देवर्षियों में, मैं नारद हूँ। 'गन्धर्वाणां चित्ररथः' — गन्धर्वों में, मैं चित्ररथ हूँ। 'सिद्धानां कपिलो मुनिः' — सिद्धों में, मैं कपिल मुनि हूँ। गन्धर्वों में चित्ररथ का समावेश ध्यान दो — दिव्य महिमा संगीत और कलात्मक क्षेत्र के सबसे अग्रणी में भी चमकती है। अंतर्दृष्टि हमारी पहचान को व्यापक करती रहती है: दिव्य महिमा मूल्य के हर क्षेत्र में चमकती है — प्राकृतिक संसार, बुद्धि, कला, और आध्यात्मिक प्राप्ति। संगीत और कला उतनी ही दिव्य महिमाएँ हैं जितनी बुद्धि और प्रकृति।

भगवद्गीता 10.26 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?

श्रीकृष्ण की सूची व्यापक होती रहती है: पवित्र वृक्ष (प्रकृति), नारद (बुद्धि और भक्ति), चित्ररथ स्वर्गीय संगीतकार (कला), कपिल (आध्यात्मिक प्राप्ति)। दिव्य महिमाओं में संगीत और कला का समावेश ध्यान दो — संगीत और सौंदर्य का शिखर बुद्धि या प्रकृति जितनी ही गहरी वास्तविकता पर एक खिड़की है। अंतर्दृष्टि एक खुली संवेदनशीलता आमंत्रित करती है: दिव्य महिमा वास्तविक मूल्य के हर क्षेत्र में चमकती है। महान संगीत, कला हमें आँसुओं तक प्रेरित कर सकते हैं क्योंकि अपने शिखर पर, वे किसी गहरी चीज़ पर खिड़कियाँ हैं। हर जगह विस्मय के लिए खुले रहो।

भगवद्गीता 10.26 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?

श्रीकृष्ण की लिस्ट ब्रॉडन होती रहती है: सेक्रेड ट्री (नेचर), नारद (विज़डम और डिवोशन), चित्ररथ सेलेस्टियल म्यूज़िशियन (आर्ट्स), कपिल (स्पिरिचुअल अटेनमेंट)। डिवाइन ग्लोरीज़ में म्यूज़िक और आर्ट का समावेश नोटिस करो — म्यूज़िक और ब्यूटी का पीक विज़डम जितनी ही डीपर रियलिटी पर एक विंडो है। इनसाइट एक वाइड-ओपन सेंसिटिविटी इनवाइट करती है: डिवाइन ग्लोरी जेन्युइन वैल्यू के हर डोमेन में चमकती है। ग्रेट म्यूज़िक तुम्हें आँसुओं तक मूव कर सकता है क्योंकि अपने पीक पर, यह किसी डीपर चीज़ पर विंडो है। हर जगह वंडर के लिए ओपन रहो।

भगवद्गीता 10.26 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?

श्रीकृष्ण सब प्रकार के क्षेत्रों से विभूतियाँ साझा करते रहते हैं! वृक्षों में, वे पवित्र अश्वत्थ हैं; बुद्धिमान ऋषियों में, वे नारद हैं; स्वर्गीय संगीतकारों में, वे सबसे महान हैं; और सिद्धों में, वे कपिल मुनि हैं! ध्यान दो वे संगीत और कला को शामिल करते हैं! यह हमें कुछ प्यारा दिखाता है: भगवान की महिमा हर अद्भुत चीज़ में चमकती है — न केवल शांत आध्यात्मिक चीज़ों में, बल्कि सुंदर संगीत, कला, प्रकृति और बुद्धि में! क्या तुमने कभी इतना सुंदर गाना सुना कि तुम्हें रोमांच हुआ? वह भावना तुम सौंदर्य के माध्यम से भगवान की महिमा की झलक पकड़ रहे हो! तो हर जगह विस्मय खोजो!

सम्बंधित श्लोक

अध्याय सन्दर्भ

श्रीकृष्ण अपनी दिव्य विभूतियों का वर्णन करते हैं — वे प्रत्येक श्रेणी में श्रेष्ठ और सार रूप हैं। उन्हें सबका मूल जानकर भक्त का प्रेम पूर्ण समर्पण में बदल जाता है।

अध्याय पढ़ें