अध्याय 10 · श्लोक 35— विभूति योग
Read this verse in English →बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम्। मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः॥
लिप्यंतरण
bṛihat-sāma tathā sāmnāṁ gāyatrī chhandasām aham māsānāṁ mārga-śhīrṣho ’ham ṛitūnāṁ kusumākaraḥ
शब्दार्थ (अन्वय)
- bṛihat-sāma
- — the Brihatsama
- tathā
- — also
- sāmnām
- — amongst the hymns in the Sama Veda
- gāyatrī
- — the Gayatri mantra
- chhandasām
- — amongst poetic meters
- aham
- — I
- māsānām
- — of the twelve months
- mārga-śhīrṣhaḥ
- — the month of November-December
- aham
- — I
- ṛitūnām
- — of all seasons
- kusuma-ākaraḥ
- — spring
भावार्थ
गायी जानेवाली श्रुतियोंमें बृहत्साम और वैदिक छन्दोंमें गायत्री छन्द मैं हूँ। बारह महीनोंमें मार्गशीर्ष और छः ऋतुओंमें वसन्त मैं हूँ।
व्याख्या
"बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम्, मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः।" — साम-वेद के स्तोत्रों में मैं बृहत्साम हूँ; छंदों में मैं गायत्री हूँ; महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ; ऋतुओं में मैं पुष्प लाने वाला वसंत हूँ। श्रीकृष्ण जारी रखते हैं। 'बृहत्साम तथा साम्नाम्' — साम-वेद के स्तोत्रों में, मैं बृहत्साम हूँ। 'गायत्री छन्दसाम् अहम्' — छंदों में, मैं गायत्री हूँ। 'मासानां मार्गशीर्षः अहम्' — महीनों में, मैं मार्गशीर्ष हूँ। 'ऋतूनां कुसुमाकरः' — ऋतुओं में, मैं वसंत हूँ। वसंत का 'ऋतुओं में' समावेश विशेष रूप से विचारोत्तेजक है। वसंत नवीकरण, खिलने, और प्रचुर जीवन की ऋतु है। अंतर्दृष्टि: दिव्य महिमा नवीकरण और ताज़ा खिलने में चमकती है। तुम्हारे अपने जीवन में ताज़ा खिलने के समय — नई शुरुआतें, सृजनात्मक खिलना — एक विशेष दिव्य महिमा रखते हैं। और जब जीवन 'सर्दी' में हो, याद रखो कि वसंत — दिव्य नवीकरण — हमेशा लौटता है।
भगवद्गीता 10.35 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?
इन विभूतियों में, सबसे विचारोत्तेजक 'ऋतुओं में, मैं वसंत हूँ' — नवीकरण, खिलने, ताज़ा विकास की ऋतु। दिव्य को वसंत से पहचानना नवीकरण और ताज़ा खिलने में चमकती दिव्य महिमा की ओर इशारा करना है। अंतर्दृष्टि गर्म और आशापूर्ण है: नवीकरण की ऋतुओं में कुछ सच में पवित्र है — नई शुरुआतें, कठिनाई के दौर के बाद सौंदर्य और ऊर्जा का खिलना। दो व्यावहारिक सबक। पहला, जब वसंत आएँ तो उन्हें पूरी तरह मनाओ। दूसरा, और महत्त्वपूर्ण: जब तुम 'सर्दी' में हो — याद रखो कि वसंत हमेशा लौटता है। नवीकरण चीज़ों की प्रकृति में बुना है। अपने वसंत मनाओ, और अपनी सर्दियों में, भरोसा करो कि नवीकरण आ रहा है।
भगवद्गीता 10.35 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?
इन ग्लोरीज़ में, सबसे एवोकेटिव है 'सीज़न्स में, मैं स्प्रिंग हूँ' — रिन्यूअल, ब्लॉसमिंग, फ्रेश ग्रोथ की सीज़न। डिवाइन को स्प्रिंग से आइडेंटिफाई करना रिन्यूअल में चमकती डिवाइन ग्लोरी की ओर पॉइंट करना है। इनसाइट वार्म और होपफुल है: रिन्यूअल की सीज़न्स में कुछ जेन्युइनली सेक्रेड है — फ्रेश स्टार्ट्स, हार्ड पीरियड के बाद एनर्जी का ब्लॉसमिंग। दो टेकअवे। फर्स्ट, स्प्रिंगटाइम्स को फुली सेलिब्रेट करो जब वे आएँ। सेकंड: जब तुम 'विंटर' में हो — याद रखो स्प्रिंग ALWAYS रिटर्न करता है। रिन्यूअल चीज़ों की नेचर में बुना है। अपने विंटर्स में, ट्रस्ट करो रिन्यूअल आ रहा है।
भगवद्गीता 10.35 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?
श्रीकृष्ण और विभूतियाँ साझा करते हैं, और सबसे सुंदर है: 'ऋतुओं में, मैं वसंत हूँ!' वसंत वह ऋतु है जब फूल खिलते हैं, पौधे ताज़े और हरे बढ़ते हैं, और सर्दी के बाद सब कुछ फिर जीवित हो जाता है! यह कहकर कि वे वसंत हैं, श्रीकृष्ण हमें दिखाते हैं कि भगवान की महिमा ताज़ी शुरुआतों, नए विकास, और सुंदर खिलने में चमकती है! यह हमें दो खुश चीज़ें सिखाता है: पहला, अपने जीवन के 'वसंत' मनाओ — नई शुरुआतों, ताज़ी ऊर्जा, और विकास के अद्भुत समय! दूसरा, और बहुत सांत्वना देने वाला: जब भी तुम कठिन 'सर्दी' से गुज़र रहे हो — याद रखो कि वसंत हमेशा वापस आता है! नई, सुंदर शुरुआतें हमेशा लौटती हैं!
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अध्याय सन्दर्भ
श्रीकृष्ण अपनी दिव्य विभूतियों का वर्णन करते हैं — वे प्रत्येक श्रेणी में श्रेष्ठ और सार रूप हैं। उन्हें सबका मूल जानकर भक्त का प्रेम पूर्ण समर्पण में बदल जाता है।
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