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अध्याय 6 · श्लोक 13आत्मसंयम योग (ध्यान योग)

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श्लोक 13 / 47

समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः। संप्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन्॥

लिप्यंतरण

samaṁ kāya-śhiro-grīvaṁ dhārayann achalaṁ sthiraḥ samprekṣhya nāsikāgraṁ svaṁ diśhaśh chānavalokayan

शब्दार्थ (अन्वय)

samam
straight
kāya
body
śhiraḥ
head
grīvam
neck
dhārayan
holding
achalam
unmoving
sthiraḥ
still
samprekṣhya
gazing
nāsika-agram
at the tip of the nose
svam
own
diśhaḥ
directions
cha
and
anavalokayan
not looking

भावार्थ

काया, शिर और ग्रीवाको सीधे अचल धारण करके तथा दिशाओंको न देखकर केवल अपनी नासिकाके अग्रभागको देखते हुए स्थिर होकर बैठे।

व्याख्या

"समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः, संप्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन्।" — शरीर, सिर और गर्दन को सीधा और स्थिर रखकर, अचल, अपनी नाक के अग्रभाग को देखते हुए, किसी दिशा में न देखते हुए। श्रीकृष्ण सटीक मुद्रा-निर्देश देते हैं। 'समं कायशिरोग्रीवम्' — धड़, सिर और गर्दन एक सीधी रेखा में। रीढ़ की यह ऊर्ध्वाधर संरेखण आवश्यक है: झुकी या मुड़ी मुद्रा तंद्रा को आमंत्रित करती है। 'अचलं स्थिरः' — गतिहीन और स्थिर। 'संप्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वम्' — अपनी नाक के अग्रभाग को देखते हुए। शंकराचार्य इसकी सावधानी से व्याख्या करते हैं: यह नाक-अग्र पर तनावपूर्ण घूरना नहीं बल्कि एक नरम, अंतर्मुखी दृष्टि है जो आँखों को भटकने से रोकती है। गहरा सिद्धांत: शरीर और मन घनिष्ठ रूप से जुड़े हैं। एक स्थिर, संरेखित शरीर स्थिर मन को कहीं अधिक सुलभ बनाता है।

भगवद्गीता 6.13 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?

मुद्रा कोई विवरण नहीं — यह आधारभूत है। एक सीधी रीढ़ तुम्हें बिना तनाव के सतर्क रखती है; एक झुकी या तो तंद्रा या बेचैनी आमंत्रित करती है। नरम, नीचे की ओर दृष्टि (भटकती आँखों के बजाय) ध्यान भटकने का एक प्रमुख चैनल काट देती है। आधुनिक विज्ञान शरीर-मन लूप की पुष्टि करता है: तुम्हारी शारीरिक मुद्रा सीधे तुम्हारी मानसिक अवस्था को आकार देती है।

भगवद्गीता 6.13 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?

पोस्चर साइड डिटेल नहीं — यह लोड-बेयरिंग है। स्ट्रेट स्पाइन = बिना टेंशन के अलर्ट। स्लम्प्ड = या तो सो जाओगे या फिजेटी हो जाओगे। सॉफ्ट डाउनवर्ड गेज़ (आँखें हर जगह डार्ट करने के बजाय) एक बड़ी डिस्ट्रैक्शन पाइपलाइन काट देती है। साइंस बॉडी-माइंड लूप को बैक करती है: तुम अपनी बॉडी कैसे होल्ड करते हो वह सीधे तुम्हारी मेंटल स्टेट शेप करता है।

भगवद्गीता 6.13 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?

श्रीकृष्ण ध्यान के लिए अच्छी बैठने की मुद्रा सिखाते हैं: अपनी पीठ, गर्दन और सिर को एक स्थिर पेड़ की तरह सीधा और ऊँचा रखो, स्थिर रहो, और अपनी आँखों को इधर-उधर देखने के बजाय धीरे से नाक की ओर नीचे देखने दो। जब तुम्हारा शरीर स्थिर होता है और तुम्हारी आँखें इधर-उधर नहीं भागतीं, तुम्हारा मन भी शांत हो जाता है!

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अध्याय सन्दर्भ

श्रीकृष्ण ध्यान की विधि — आसन, स्थान, संयमित जीवन और चंचल मन को स्थिर करने का उपाय बताते हैं। वे आश्वासन देते हैं कि किसी का भी शुभ प्रयास व्यर्थ नहीं जाता।

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