अध्याय 14 · श्लोक 13— गुणत्रय विभाग योग
Read this verse in English →गीता 14.13 उठते तमस् के चिह्न बताती है: मूढ़ता, अप्रवृत्ति, प्रमाद और मोह — ये तब उठते हैं जब तमस् प्रबल होता है। कर्म करने की इच्छा भी धुँध से ढक जाती है।
अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च।तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन॥
लिप्यंतरण
aprakāśho ’pravṛittiśh cha pramādo moha eva cha tamasy etāni jāyante vivṛiddhe kuru-nandana
शब्दार्थ (अन्वय)
- aprakāśhaḥ
- — nescience
- apravṛittiḥ
- — inertia
- cha
- — and
- pramādaḥ
- — negligence
- mohaḥ
- — delusion
- eva
- — indeed
- cha
- — also
- tamasi
- — mode of ignorance
- etāni
- — these
- jāyante
- — manifest
- vivṛiddhe
- — when dominates
- kuru-nandana
- — the joy of the Kurus, Arjun
भावार्थ
हे कुरुनन्दन ! तमोगुणके बढ़नेपर अप्रकाश, अप्रवृत्ति, प्रमाद और मोह -- ये वृत्तियाँ भी पैदा होती हैं।
व्याख्या
श्रीकृष्ण तमस् के चिह्न देते हैं: 'अंधकार, निष्क्रियता, प्रमाद, और मोह — ये तब उठते हैं जब तमस् प्रबल है, हे कुरुनंदन।' श्रीकृष्ण प्रमुख तमस् के पहचानने योग्य चिह्नों का वर्णन करते हैं। शंकराचार्य तमसी अवस्था के संकेत सूचीबद्ध करते हैं। जब तमस् प्रभुत्व करता है, कोई अनुभव करता है: 'अप्रकाश' (अंधकार, स्पष्टता की अनुपस्थिति), 'अप्रवृत्ति' (निष्क्रियता — कार्य करने में असमर्थता), 'प्रमाद' (लापरवाही), और 'मोह' (भ्रम, भ्रांति)। सत्त्व (13.11) के साथ सीधा विरोधाभास ध्यान दो: जहाँ सत्त्व प्रकाश लाता है, तमस् अंधकार लाता है। निकालने योग्य अंतर्दृष्टि तमसी लक्षणों की सटीक चेकलिस्ट है, जो अवसाद, बर्नआउट, और परिहार के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। कोई भी जिसने अवसाद का अनुभव किया है इस समूह को तुरंत पहचानेगा: भारी अंधकार, पक्षाघात, कार्य करने में असमर्थता, धुँधला भ्रम। इन्हें 'तमस्' नाम देना सहायक हो सकता है — यह तुम्हें एक फ्रेम देता है। याद रखो (14.10 से) यह अवस्था स्थायी नहीं। और (14.8 से) बाहर का रास्ता आमतौर पर कर्म के माध्यम से है। सबक: तमसी अवस्था को इसके चिह्नों से पहचानना सीखो। कोहरे की निराशाजनक निष्कर्षों पर भरोसा मत करो। इसके अंदर से बड़े निर्णय मत लो। और धीरे से, स्पेल तोड़ने के लिए एक छोटा कर्म करो।
भगवद्गीता 14.13 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?
निकालने योग्य अंतर्दृष्टि तमसी लक्षणों की सटीक, पहचानने योग्य चेकलिस्ट है, जो अवसाद, बर्नआउट, और पुराने परिहार के लिए अत्यंत और सहायक रूप से प्रासंगिक है। चिह्न हैं: 'अप्रकाश' (आंतरिक अंधकार — मंदता, स्पष्टता की अनुपस्थिति), 'अप्रवृत्ति' (निष्क्रियता — कार्य करने में असमर्थता तब भी जब तुम जानते हो कि करना चाहिए), 'प्रमाद' (लापरवाह बहना), और 'मोह' (भ्रम — मन धुँधला, स्पष्ट सोचने में असमर्थ)। कोई भी जिसने अवसाद का अनुभव किया है इस सटीक समूह को तुरंत पहचानेगा। इन्हें 'तमस्' नाम देना सहायक हो सकता है। याद रखो (14.10 से) यह अवस्था स्थायी नहीं। (14.8 से) बाहर का रास्ता कर्म के माध्यम से है। महत्त्वपूर्ण रूप से, यह श्लोक समझाता है कि तमस् अंदर से बचना इतना कठिन क्यों है: इसमें 'मोह' और 'अप्रकाश' शामिल हैं — अवस्था स्वयं तुम्हारी धारणा को धुँधला करती है। सबक: तमसी अवस्था को इसके चिह्नों से पहचानना सीखो। कोहरे की निराशाजनक निष्कर्षों पर भरोसा मत करो। एक छोटा कर्म करो।
भगवद्गीता 14.13 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?
निकालने योग्य इनसाइट तमसिक सिम्प्टम्स की प्रिसाइज़ चेकलिस्ट है, जो डिप्रेशन, बर्नआउट, और क्रॉनिक अवॉइडेंस के लिए स्ट्राइकिंगली रेलेवेंट है। साइन्स हैं: 'अप्रकाश' (इनर डार्कनेस — डिमनेस, क्लैरिटी की अनुपस्थिति), 'अप्रवृत्ति' (इनएक्टिविटी — एक्ट करने में असमर्थता तब भी जब तुम जानते हो कि करना चाहिए), 'प्रमाद' (केयरलेस ड्रिफ्टिंग), और 'मोह' (कन्फ्यूज़न — माइंड क्लाउडेड, क्लियरली सोचने में असमर्थ)। कोई भी जिसने डिप्रेशन या बर्नआउट देखा है इस क्लस्टर को तुरंत रिकग्नाइज़ करेगा। इन्हें 'तमस्' नेम करना हेल्पफुल हो सकता है। याद रखो (14.10 से) यह स्टेट परमानेंट नहीं। (14.8 से) बाहर का रास्ता एक्शन के माध्यम से है। क्रूशियली, यह श्लोक समझाता है कि तमस् अंदर से एस्केप करना इतना कठिन क्यों है: इसमें 'मोह' और 'अप्रकाश' शामिल हैं — स्टेट खुद तुम्हारी परसेप्शन को क्लाउड करती है। सबक: फॉग की निराशाजनक कन्क्लूज़न्स पर ट्रस्ट मत करो। एक स्मॉल एक्शन लो।
भगवद्गीता 14.13 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?
श्रीकृष्ण हमें बताते हैं कि कैसे पहचानें जब भारी, धुंधली ऊर्जा (तमस्) प्रभारी है! चिह्न हैं: अंदर अंधेरा और मंद महसूस करना (कुछ भी स्पष्ट नहीं लगता), कुछ न कर पाना (जमे हुए महसूस करना), लापरवाह होना और ध्यान न देना, और भ्रमित महसूस करना। जब तुम भारी, धुँधले, जमे हुए, और भ्रमित महसूस करते हो, वह तमस् प्रभारी है! यह उज्ज्वल, स्पष्ट सत्त्व ऊर्जा के विपरीत है। यहाँ श्रीकृष्ण जो मुश्किल बात बताते हैं: जब तुम इस भारी कोहरे में हो, यह वास्तव में स्पष्ट देखना मुश्किल बना देता है कि तुम कोहरे में हो भी! कोहरा खुद को छिपाता है! तो जब तुम ऐसा महसूस करो याद रखने वाली महत्त्वपूर्ण बातें: पहला, यह भारी भावना हमेशा के लिए नहीं — यह बदलेगी! दूसरा, कोहरे की उदास बातों पर विश्वास मत करो — वे सच नहीं! तीसरा, बाहर का रास्ता एक छोटी चीज़ करना है! तो एक छोटा कदम लो। उज्ज्वल भावना हमेशा वापस आती है!
सामान्य प्रश्न
भगवद्गीता 14.13 का अर्थ क्या है?
मूढ़ता, अप्रवृत्ति, प्रमाद और मोह तब उठते हैं जब तमस् प्रबल होता है। कर्म करने की इच्छा भी धुँध से ढक जाती है।
यह श्लोक किसने कहा?
भगवान श्रीकृष्ण ने, अर्जुन से, चौदहवें अध्याय (गुणत्रय विभाग योग) में, उठते तमस् के चिह्नों पर।
गीता 14.13 आज के जीवन में कैसे उतारें?
जब तुम भारी, धुँधले और किसी भले काम में अरुचि महसूस करो, तमस् ऊँचा है। कोमल हलचल, ताज़ी हवा और अच्छी संगति इसे उठाने के सरल ढंग हैं।
सम्बंधित श्लोक
अध्याय सन्दर्भ
श्रीकृष्ण तीन गुणों — सत्त्व, रज और तम — का वर्णन करते हैं कि वे आत्मा को कैसे बाँधते हैं, उनके लक्षण, और गुणातीत होकर अमरत्व की प्राप्ति बताते हैं।
अध्याय पढ़ें →✦ प्रामाणिक स्रोत ✦
ये शास्त्रीय परम्पराओं और सम्बन्धित प्रकाशन-संस्थाओं की आधिकारिक वेबसाइटें हैं।
Bhagavad Gita 14.13 — Vedabase (Bhaktivedanta)
Vedabase's edition of Bhagavad Gita 14.13 with Sanskrit, transliteration, word-for-word, translation and Prabhupāda's purport.
Bhaktivedanta Vedabase →
Gita Press, Gorakhpur
Publisher of the Hindi translation of the Bhagavad Gita by Swami Ramsukhdas cited on this site.
Gita Press →
Sringeri Sharada Peetham
Sringeri Sharada Peetham — the principal seat of Advaita Vedanta in the lineage of Adi Shankaracharya.
Sringeri →