अध्याय 12 · श्लोक 7— भक्ति योग
Read this verse in English →तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्।भवामि नचिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम्॥
लिप्यंतरण
teṣhām ahaṁ samuddhartā mṛityu-saṁsāra-sāgarāt bhavāmi na chirāt pārtha mayy āveśhita-chetasām
शब्दार्थ (अन्वय)
- teṣhām
- — of those
- aham
- — I
- samuddhartā
- — the deliverer
- mṛityu-saṁsāra-sāgarāt
- — from the ocean of birth and death
- bhavāmi
- — (I) become
- na
- — not
- chirāt
- — after a long time
- pārtha
- — Arjun, the son of Pritha
- mayi
- — with me
- āveśhita chetasām
- — of those whose consciousness is united
भावार्थ
हे पार्थ ! मेरेमें आविष्ट चित्तवाले उन भक्तोंका मैं मृत्युरूप संसार-समुद्रसे शीघ्र ही उद्धार करनेवाला बन जाता हूँ।
व्याख्या
"तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्, भवामि न चिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम्।" — हे पार्थ, जिनके मन मुझमें लगे हैं, उनका मैं शीघ्र ही मृत्यु और संसार के सागर से उद्धारक बन जाता हूँ। श्रीकृष्ण अपने भक्तों को एक सुंदर वादा देते हैं। शंकराचार्य दो सुंदर पहलू उजागर करते हैं। पहला, 'समुद्धर्ता' — श्रीकृष्ण सक्रिय रूप से भक्त को ऊपर और बाहर उठाते हैं, जैसे किसी को विशाल सागर में डूबने से बचाना। दिव्य एक निष्क्रिय लक्ष्य नहीं बल्कि एक सक्रिय उद्धारक है। दूसरा, 'न चिरात्' — शीघ्र ही, बिना अधिक देरी। अंतर्दृष्टि गहराई से आश्वस्त करने वाली है: जब तुम जो उच्चतम है उसे पूरे दिल से अपना हृदय देते हो, तुम अकेले संघर्ष करने को नहीं छोड़े जाते — तुम्हें सक्रिय रूप से मदद, उठाया, बचाया जाता है। हमारा बहुत सा संघर्ष जीवन की कठिनाइयों के अभिभूत सागर में अकेले डूबने जैसा महसूस होता है। पर यह श्लोक वादा करता है कि पूर्ण-हृदय भक्ति सक्रिय मदद से मिलती है। पूरे दिल से किसी उच्च को अपना हृदय दो, और भरोसा करो कि तुम्हें मिला, उठाया, मदद किया जाएगा।
भगवद्गीता 12.7 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?
श्रीकृष्ण एक कोमल, शक्तिशाली वादा देते हैं: जो अपने हृदय पूरे दिल से उच्चतम को देते हैं, उनके वे सक्रिय रूप से उद्धारक बन जाते हैं, उन्हें 'मृत्यु और संसार के सागर' से बाहर उठाते हैं — और 'शीघ्र ही।' अंतर्दृष्टि गहराई से आश्वस्त करने वाली है: जब तुम जो उच्चतम है उसे पूरे दिल से अपना हृदय देते हो, तुम अकेले संघर्ष करने को नहीं छोड़े जाते — तुम्हें सक्रिय रूप से मदद, उठाया, बचाया जाता है। हमारा बहुत सा संघर्ष जीवन की कठिनाइयों के अभिभूत सागर में अकेले डूबने जैसा महसूस होता है। पर यह श्लोक वादा करता है कि पूर्ण-हृदय भक्ति सक्रिय मदद से मिलती है। किसी ऐसे के लिए जो अभी डूबता महसूस करता है: पूरे दिल से किसी उच्च को अपना हृदय दो, और भरोसा करो कि तुम्हें मिला, उठाया जाएगा। तुम्हें यह सब अकेले नहीं करना।
भगवद्गीता 12.7 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?
श्रीकृष्ण एक टेंडर, पावरफुल प्रॉमिस देते हैं: जो अपने हार्ट्स होलहार्टेडली हाईएस्ट को देते हैं, उनके वे एक्टिवली सेवियर बन जाते हैं, उन्हें 'डेथ और रीबर्थ के ओशन' से लिफ्ट करते हैं — और 'बिफोर लॉन्ग।' इमेज स्ट्राइकिंग है और इनसाइट डीपली रीअश्योरिंग: जब तुम हाईएस्ट को होलहार्टेडली अपना हार्ट देते हो, तुम अकेले स्ट्रगल करने को नहीं छोड़े जाते — तुम्हें एक्टिवली हेल्प, लिफ्ट, रेस्क्यू किया जाता है। पिक्चर करो: वास्ट ओशन में डूबते, तुम अकेले अपनी थ्रैशिंग से खुद को सेव नहीं कर सकते — पर एक स्ट्रॉन्ग हैंड रीच डाउन करता है। हमारा बहुत सा स्ट्रगल लाइफ की डिफिकल्टीज़ के ओशन में अकेले डूबने जैसा फील होता है। किसी ऐसे के लिए जो अभी डूबता फील करता है: होलहार्टेडली किसी हायर को अपना हार्ट दो, और ट्रस्ट करो कि तुम्हें मेट, लिफ्ट किया जाएगा। तुम्हें यह सब अकेले नहीं करना।
भगवद्गीता 12.7 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?
श्रीकृष्ण उनके लिए एक सुंदर, सांत्वना देने वाला वादा करते हैं जो पूरे हृदय से भगवान को प्रेम करते हैं: 'मैं उनका उद्धारक बन जाता हूँ! मैं उन्हें मुसीबतों के महान सागर से बाहर उठाता हूँ और सुरक्षा में लाता हूँ — और मैं इसे जल्दी करता हूँ!' कल्पना करो कोई विशाल सागर में संघर्ष कर रहा है, और एक मज़बूत, प्रेमपूर्ण हाथ उन्हें सुरक्षा में खींचने के लिए नीचे पहुँचता है। यह हमें कुछ बहुत सांत्वना देने वाला सिखाता है: जब तुम अपना पूरा हृदय जो अच्छा और उच्चतम है उसे देते हो, तुम अकेले नहीं — तुम्हें मदद मिलती है! कभी-कभी जीवन ऐसा लगता है जैसे हम चिंताओं के विशाल सागर में तैर रहे हैं, सब अकेले। पर यह श्लोक वादा करता है: तुम्हें यह सब अकेले नहीं करना! प्रेमपूर्ण हाथ तुम्हें उठाने को तैयार हैं!
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अध्याय सन्दर्भ
श्रीकृष्ण सगुण भक्ति को सरलतम और निश्चित मार्ग बताते हैं। वे विभिन्न साधकों हेतु क्रमिक साधन और उन गुणों का वर्णन करते हैं जिनसे भक्त उन्हें प्रिय होता है।
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