अध्याय 11 · श्लोक 6— विश्वरूप दर्शन योग
Read this verse in English →पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्िवनौ मरुतस्तथा। बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याऽश्चर्याणि भारत॥
लिप्यंतरण
paśhyādityān vasūn rudrān aśhvinau marutas tathā bahūny adṛiṣhṭa-pūrvāṇi paśhyāśhcharyāṇi bhārata
शब्दार्थ (अन्वय)
- paśhya
- — behold
- ādityān
- — the (twelve) sons of Aditi
- vasūn
- — the (eight) Vasus
- rudrān
- — the (eleven) Rudras
- aśhvinau
- — the (twin) Ashvini Kumars
- marutaḥ
- — the (forty-nine) Maruts
- tathā
- — and
- bahūni
- — many
- adṛiṣhṭa
- — never revealed
- pūrvāṇi
- — before
- paśhya
- — behold
- āśhcharyāṇi
- — marvels
- bhārata
- — Arjun, scion of the Bharatas
भावार्थ
हे भरतवंशोद्भव अर्जुन! तू बारह आदित्योंको, आठ वसुओंको, ग्यारह रुद्रोंको और दो अश्विनीकुमारोंको तथा उनचास मरुद्गणोंको देख। जिनको तूने पहले कभी देखा नहीं, ऐसे बहुत-से आश्चर्यजनक रूपोंको भी तू देख।
व्याख्या
"पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा, बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत।" — आदित्यों, वसुओं, रुद्रों, दोनों अश्विनों, और मरुतों को देखो; हे भारत, पहले कभी न देखे गए अनेक आश्चर्यों को देखो। श्रीकृष्ण अर्जुन की दृष्टि निर्देशित करते रहते हैं। 'पश्य आदित्यान् वसून् रुद्रान् अश्विनौ मरुतः तथा' — स्वर्गीय प्राणियों के विभिन्न वर्ग देखो। ब्रह्मांडीय रूप में, अर्जुन ब्रह्माण्ड की सब दिव्य शक्तियों को देख सकता है। 'बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत' — पहले कभी न देखे गए अनेक आश्चर्य देखो। शंकराचार्य 'अदृष्टपूर्वाणि' पर बल देते हैं। अंतर्दृष्टि सामान्य धारणा से परे जो है उसकी विशालता की ओर इशारा करती है। यह एक विनम्र और विस्तृत याद दिलाने वाला है: वास्तविकता में हमारी सीमित रोज़मर्रा की धारणा जो प्रकट करती है उससे कहीं अधिक है। मत मानो कि जो तुम सामान्यतः देखते हो वही सब कुछ है। 'पहले कभी न देखे आश्चर्यों' के लिए खुले और विनम्र रहो।
भगवद्गीता 11.6 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?
श्रीकृष्ण अर्जुन को 'पहले कभी न देखे आश्चर्य' देखने को आमंत्रित करते हैं — वास्तविकताएँ जो सच में हैं पर जिन्हें सामान्य दृष्टि नहीं पहुँच सकती। यह एक विनम्र और विस्तृत याद दिलाने वाला है: वास्तविकता में हमारी सीमित रोज़मर्रा की धारणा जो प्रकट करती है उससे कहीं अधिक है। आधुनिक विज्ञान इसकी पुष्टि करता है: ब्रह्माण्ड का अधिकांश हमारे लिए अदृश्य है — डार्क मैटर, विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम का छोटा सा हिस्सा, क्वांटम क्षेत्र। हमारी सामान्य धारणा एक विशाल वास्तविकता पर एक छोटी खिड़की है। मत मानो कि जो तुम समझते हो वही सब कुछ है। अपनी धारणा की सीमाओं के बारे में विनम्र रहो, और विस्मय के लिए खुले रहो।
भगवद्गीता 11.6 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?
श्रीकृष्ण अर्जुन को 'पहले कभी न देखे वंडर्स' देखने को इनवाइट करते हैं — रियलिटीज़ जो सच में एग्ज़िस्ट करती हैं पर जिन्हें ऑर्डिनरी साइट एक्सेस नहीं कर सकती। यह एक हम्बलिंग, एक्सपैंसिव रिमाइंडर है: रियलिटी में हमारी लिमिटेड एवरीडे परसेप्शन जो रिवील करती है उससे कहीं ज़्यादा है। साइंस इसे हार्ड बैक करती है: कॉस्मॉस का अधिकांश हमारे लिए इनविज़िबल है — डार्क मैटर, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम का स्लाइवर, क्वांटम रेल्म। हमारी नॉर्मल परसेप्शन एक इमेन्स रियलिटी पर एक टाइनी विंडो है। मत मानो कि जो तुम परसीव करते हो वही सब है। अपनी परसेप्शन की लिमिट्स के बारे में हम्बल रहो, वंडर के लिए ओपन रहो।
भगवद्गीता 11.6 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?
श्रीकृष्ण अर्जुन को सब अद्भुत स्वर्गीय प्राणी दिखाते हैं — आकाश-देव, तूफान-देव, दिव्य चिकित्सक, वायु-देव — सब एक साथ अपने ब्रह्मांडीय रूप में! और वे कहते हैं: 'पहले कभी न देखे अनेक आश्चर्य देखो!' यह हमें कुछ अद्भुत सिखाता है: दुनिया में हम जो आमतौर पर देखते हैं उससे कहीं अधिक है! जैसे अर्जुन को ऐसे आश्चर्य देखने मिले जो किसी ने कभी नहीं देखे, असली ब्रह्माण्ड हमारी रोज़मर्रा की आँखों से परे अविश्वसनीय चीज़ों से भरा है! क्या तुम जानते हो ब्रह्माण्ड का अधिकांश हमारे लिए अदृश्य है? तो एक अद्भुत सबक: कभी मत सोचो कि तुमने सब देख लिया! जिज्ञासु और विनम्र रहो!
सम्बंधित श्लोक
अध्याय सन्दर्भ
दिव्य दृष्टि पाकर अर्जुन श्रीकृष्ण के विराट विश्वरूप का दर्शन करते हैं जिसमें समस्त लोक, देव और काल समाहित हैं। भयभीत होकर वे पुनः सौम्य रूप के दर्शन की प्रार्थना करते हैं।
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