AskGita

अध्याय 6 · श्लोक 39आत्मसंयम योग (ध्यान योग)

Read this verse in English
श्लोक 39 / 47

एतन्मे संशयं कृष्ण छेत्तुमर्हस्यशेषतः। त्वदन्यः संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते॥

लिप्यंतरण

etan me sanśhayaṁ kṛiṣhṇa chhettum arhasyaśheṣhataḥ tvad-anyaḥ sanśhayasyāsya chhettā na hyupapadyate

शब्दार्थ (अन्वय)

etat
this
me
my
sanśhayam
doubt
kṛiṣhṇa
Krishna
chhettum
to dispel
arhasi
you can
aśheṣhataḥ
completely
tvat
than you
anyaḥ
other
sanśhayasya
of doubt
asya
this
chhettā
a dispeller
na
never
hi
certainly
upapadyate
is fit

भावार्थ

हे कृष्ण! मेरे इस सन्देहका सर्वथा छेदन करनेके लिये आप ही योग्य हैं; क्योंकि इस संशयका छेदन करनेवाला आपके सिवाय दूसरा कोई हो नहीं सकता।

व्याख्या

"एतन्मे संशयं कृष्ण छेत्तुमर्हस्यशेषतः, त्वदन्यः संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते।" — हे कृष्ण, मेरे इस संशय को पूर्णतः छेदने योग्य आप हैं; क्योंकि आपके अतिरिक्त इस संशय का छेदक कोई नहीं मिलता। अर्जुन अपना प्रश्न हार्दिक अपील के साथ समाप्त करता है। वह अपनी चिंता को 'संशय' — एक संदेह — कहता है, और श्रीकृष्ण से इसे 'अशेषतः,' पूर्णतः काटने को कहता है। और वह श्रद्धा की एक सुंदर अभिव्यक्ति जोड़ता है: आपके अतिरिक्त कोई इस संदेह को दूर करने में सक्षम नहीं। शंकराचार्य इस अपील का महत्त्व बताते हैं। असफल साधक की गति का प्रश्न ऐसा नहीं जिसका सामान्य सांसारिक ज्ञान उत्तर दे सके। यह जन्मों भर कर्म के कार्य से सम्बन्धित है। केवल वही जो परम सत्य को प्रत्यक्ष जानता है, आधिकारिक उत्तर दे सकता है। अर्जुन के शब्द आदर्श छात्र-स्वभाव का मॉडल भी बनाते हैं।

भगवद्गीता 6.39 आज के जीवन में कैसे प्रासंगिक है?

अर्जुन यहाँ दो चीज़ें अच्छी करता है जिनसे हम सीख सकते हैं। पहला, वह अपना संदेह खुलकर नाम करता है और इसे 'पूर्णतः' हल करने को कहता है — कोई आधा-उत्तर नहीं। दूसरा, वह उस एक स्रोत की ओर मुड़ता है जिस पर वह सच में भरोसा करता है। यह पहचानने में बुद्धि है कि कौन से प्रश्न सामान्य जानकारी से उत्तरित नहीं हो सकते और गहरे स्रोत की माँग करते हैं। ईमानदार प्रश्न और वास्तविक भरोसे का संयोजन वही खुलापन है जिसमें रूपांतरकारी उत्तर उतर सकते हैं।

भगवद्गीता 6.39 आज के युवाओं (Gen Z) के लिए क्या सीख देती है?

अर्जुन यहाँ दो स्मार्ट चीज़ें करता है। पहला, वह अपने डाउट को आउट लाउड नेम करता है और इसे 'completely' क्लियर करने को कहता है — कोई हाफ-आंसर नहीं। दूसरा, वह उस एक सोर्स की ओर मुड़ता है जिस पर वह सच में ट्रस्ट करता है। यह पहचानने में रियल विज़डम है कि कौन से सवाल क्विक गूगल से सॉल्व नहीं हो सकते। ऑनेस्ट क्वेश्चनिंग + रियल ट्रस्ट का कॉम्बो वही ओपननेस है जो ट्रांसफॉर्मेटिव आंसर को लैंड करने देता है।

भगवद्गीता 6.39 बच्चों को सरल भाषा में कैसे समझाएँ?

अर्जुन श्रीकृष्ण से प्यार से पूछता है: 'कृपया मेरे इस संदेह को पूरी तरह दूर करें — क्योंकि आपके अलावा कोई इतने गहरे प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकता!' अर्जुन हमें सीखने का एक बढ़िया तरीका दिखाता है: अपना प्रश्न खुलकर और ईमानदारी से पूछो, और जिस बुद्धिमान व्यक्ति से पूछ रहे हो उस पर भरोसा करो। कुछ प्रश्न इतने गहरे होते हैं कि तुम्हें किसी ऐसे से पूछना चाहिए जो सच में जानता है!

सम्बंधित श्लोक

अध्याय सन्दर्भ

श्रीकृष्ण ध्यान की विधि — आसन, स्थान, संयमित जीवन और चंचल मन को स्थिर करने का उपाय बताते हैं। वे आश्वासन देते हैं कि किसी का भी शुभ प्रयास व्यर्थ नहीं जाता।

अध्याय पढ़ें